रणनीतिक व्यवसाय परामर्श

भारत में व्यवसाय खड़ा करने और उसे सफलतापूर्वक चलाने के लिए कंपनी अधिनियम, कराधान नियमों, श्रम कानूनों और अनुबंध शर्तों की गहरी समझ आवश्यक है। शुरुआती चरणों में किया गया एक भी गलत कदम — जैसे एक कमजोर संस्थापक समझौता (Founder Agreement), एक असुरक्षित ट्रेडमार्क, या गैर-अनुपालन योग्य रोजगार अनुबंध — आपके व्यवसाय को भविष्य में बड़ी मुकदमों में फंसा सकता है। हमारी कॉर्पोरेट कानूनी सलाहकार टीम स्टार्टअप्स, एमएसएमई (MSMEs) और स्थापित कंपनियों को कानूनी सुरक्षा चक्र प्रदान करती है ताकि वे बिना किसी बाधा के विकास कर सकें।

व्यवसाय गठन और पंजीकरण

हम उद्यमियों को उनके व्यावसायिक उद्देश्यों के अनुसार सही कॉर्पोरेट संरचना चुनने में सहायता करते हैं — प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, वन पर्सन कंपनी (OPC), लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) या पार्टनरशिप फर्म। हम नाम की स्वीकृति, मेमोरेंडम और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (MOA/AOA) का प्रारूपण, और MCA पोर्टल पर पंजीकरण कराकर इनकॉर्पोरेशन सर्टिफिकेट दिलाने तक संपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

अनुबंध प्रारूपण और समीक्षा (Contract Drafting)

हर सफल व्यवसाय अनुबंधों पर चलता है। हम आपकी लायबिलिटी को सीमित करने और अधिकारों की रक्षा के लिए सेवा स्तर समझौतों (SLAs), मास्टर सेवा समझौतों (MSAs), गोपनीयता समझौतों (NDAs), गैर-प्रतिस्पर्धा समझौतों (Non-compete), वाणिज्यिक पट्टा विलेखों (Lease Deeds) और रोजगार अनुबंधों का अत्यंत सावधानीपूर्वक प्रारूपण और समीक्षा करते हैं।

बौद्धिक संपदा संरक्षण (IPR Protection)

आपका ब्रांड नाम, लोगो, मालिकाना सॉफ़्टवेयर और रचनात्मक कार्य आपके व्यवसाय की अमूल्य संपत्तियां हैं। हम ट्रेडमार्क पंजीकरण (Trademark Registration), कॉपीराइट पंजीकरण और पेटेंट फाइलिंग में सहायता प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त, बौद्धिक संपदा के उल्लंघन पर कानूनी नोटिस (Cease-and-Desist Notice) जारी करने और मुकदमों में आपके अधिकारों की सुरक्षा करते हैं।

नियामक अनुपालन और ड्यू डिलिजेंस

हम कंपनियों को कंपनी अधिनियम 2013, एमएसएमई अधिनियम, श्रम कानूनों, पर्यावरण नियमों और पॉश (POSH) अधिनियम के तहत पूर्ण अनुपालन (Compliance) बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके अतिरिक्त, व्यापार विलय (M&A), संयुक्त उपक्रमों और निवेश दौरों (Funding Rounds) के लिए विस्तृत कानूनी जांच (Due Diligence) का संचालन करते हैं ताकि जोखिमों को कम किया जा सके।

कॉर्पोरेट कानून वकील दिल्ली

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी और एलएलपी (LLP) में क्या अंतर है?

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में शेयरधारक और निदेशक होते हैं और यह उन स्टार्टअप के लिए सर्वोत्तम है जो भविष्य में बाहरी इक्विटी फंड जुटाना चाहते हैं। एलएलपी (सीमित दायित्व भागीदारी) साझेदारी की लचीलेपन और सीमित दायित्व की सुरक्षा का समन्वय है, जिसमें कम अनुपालन और कम प्रशासनिक लागत होती है। हम आपके उद्देश्यों के अनुसार उचित संरचना का सुझाव देते हैं।

क्या भारत में मौखिक समझौता (Verbal Agreement) कानूनी रूप से बाध्यकारी है?

हाँ, भारतीय अनुबंध अधिनियम 1872 के तहत, एक मौखिक समझौता वैध हो सकता है यदि उसमें एक अनुबंध के सभी आवश्यक तत्व (जैसे प्रस्ताव, स्वीकृति, सहमति और प्रतिफल) मौजूद हों। हालांकि, कोर्ट में मौखिक शर्तों को साबित करना अत्यंत कठिन होता है। लिखित और हस्ताक्षरित समझौता सदैव सर्वोत्तम होता है।

भारत में ट्रेडमार्क पंजीकरण (Trademark Registration) में कितना समय लगता है?

ट्रेडमार्क आवेदन जमा करने के तुरंत बाद आप 'TM' चिह्न का उपयोग कर सकते हैं। आवेदन के परीक्षण (Examination), जर्नल में प्रकाशन और बिना किसी विरोध के पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी होने की पूरी प्रक्रिया में आम तौर पर 18 से 24 महीने का समय लगता है।

दिल्ली में व्यवसायों के लिए पॉश (POSH) अनुपालन आवश्यकता क्या है?

POSH अधिनियम 2013 के तहत, 10 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक संगठन के लिए कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन करना, नीति तैयार करना, वार्षिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित करना और वार्षिक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य है। हम पूर्ण नीति और समिति गठन में कंपनियों की सहायता करते हैं।

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